आइये दिया जलायें

Written by Himanshu Kumar | Published on: October 31, 2016

Courtesy:WikiVisually

व्यापम घोटालेबाज भाजपाई मुख्यमंत्री शिवराज सिंह,
जिसने मामले की पोल खोलने की कोशिश करने वाले सत्तर से ज़्यादा लोगों का कत्ल करवाया ,
टीवी पर बोल रहा है कि आइये पहला दिया सैनिकों के नाम जलायें,
जवानों को अपनी सत्ता के लिये मरवा कर फर्जी देशभक्ति का ढोंग देख कर घिन आती है ,

मेरा प्रस्ताव है कि भाजपाई लोग देश के भीतर भाजपा और संघ की फैलाई गई नफरत की वजह से मारे गये लोगों के लिये कुछ दीपक जरूर जला लें ,
सेना के जवान के निर्दोष पिता अखलाक के लिये एक दिया ज़रूर जलाइयेगा ,
जिसे फ़र्जी खबर फैला कर भाजपाइयों ने घर में घुस कर मार दिया ,
दो दीपक झारखण्ड में फांसी पर लटका दिये गये दो मुस्लिम देशवासियों के लिये ,
जिनमे से एक की उम्र सिर्फ चौदह साल थी ,

दीपकों में थोड़ा तेल गुजरात के उन दलित देशवासियों के नाम पर ज़रूर डालना जिन्हें पुलिस थाने के सामने बांध कर जानवरों की तरह पीटा गया ,
एक सौ बारह दीपक उन एक सौ बारह निर्दोष आदिवासियों के नाम पर जिन्हें इसी साल मार डाला गया राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत दोभाल के आदेश पर छत्तीसगढ़ में ,
पांच दीपक बड़कागांव में गोली से उड़ा दिये गये पांच लोगों के नाम पर जिन्हें इसलिये मार डाला गया ,
क्योंकि उनकी जमीनों के नीचे कोयला है ,
एक दीपक उस मुस्लिम लड़के के नाम जिसे झारखण्ड में थाने में पीट पीट कर मार डाला गया सिर्फ इसलिये क्योंकि उसने मुसलमान होने के बावजूद व्हाट्सएप पर अपने भोजन की प्राथमिकता बताने की ज़ुर्रत करी थी,

एक दीप नजीब के नाम , जिसे सत्ता दल के गुण्डों ने जेएनयू में पीटा और गायब कर दिया और जिसकी मां की चीखें ढ़ोंगी राष्ट्रभक्तों के शोर शराबे में दबाई जा रही है आज भी,

दो दीपक बस्तर के दो आदिवासी छात्रों के नाम पर, जिन्हें घर से निकाल कर महज़ इसलिये गोली से उड़ा दिया गया, ताकि पुलिस का ख़ौफ क़ायम रहे आदिवासियों के दिलों में ,
अट्ठावन दीपक बस्तर की उन अट्ठावन आदिवासी औरतों के नाम पर जिनके साथ भाजपा सरकार नें सुरक्षा बल के जवानों से इसलिये बलात्कार करवाये जिससे आदिवासी अडानी के लिये ज़मीन छोड़ कर भाग जायें ,
एक दीपक, मड़कम हिड़मे के नाम जिसके साथ भाजपा शासन में सैनिकों द्वारा बलात्कार के बाद योनी में चाकू डाल कर नाभी तक चीर दिया गया , ताकि भाजपा को चन्दा मिलता रहे अमीर उद्योगपतियों से, आदिवासियों की जमीनों पर कब्ज़े के बदले,

एक दिया खुद के नाम पर ताकि भीतर की साम्प्रदायिकता , घोर घृणा और अनंत लोभ का अंधेरा छंट कर इंसानियत की रोशनी आप तक आ सके